By Village Missionary Movement
Wednesday, 10-Nov-2021दैनिक भक्ति (Hindi) 10-11-2021
दो लाइन के बीच में
"...निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं |” - फिलिप्पियों 3:14
बेन्नी शेपर्ट अपना 13वां उम्र में पीठ का हड्डी टूटकर थोड़ी देर भी खड़ा होने के लिए, चलने के लिए नहीं बना बहुत दर्द भी होता था | ऐसा हालत में शादी भी हुवा दो बच्चों का मां बनने के बावजूद भी अपने काम को नहीं कर सकती दूसरों का मदद को चाहने का परिस्थिति था तो बहुत दुखी से प्रार्थना करने के समय में "अद्भुत को ढूंढकर दौड़" करके एक आवाज को सुनी थी | सचमुच यह तो प्रभु का वाणी है समझ कर उसका मानने का निर्णय की थी | वह दौड़ की खिलाड़ी नहीं होने से भी 26.2 माइल का मारतन दौड़ में दौड़ने का निर्णय ली थी | उसका दर्द के अनुसार चलना भी दिक्कत है दौड़ना कैसे हो सकता है? फिर भी प्रभु का चमत्कार को पाने चाहकर, डॉक्टर ही कोचिंग दिए थे तो 6 महीना में कठिन प्रशिक्षण पाई थी |
24000 लोग शामिल होने का उस खेल में शुरू का लाइन में आकर खड़ी हुई तो 28 सालों से उसको यह जो पीठ का दर्द था उस से हट गया है | 7 घंटे का दौड़ में दौड़ने के समय में बहुत थकावट होने से भी आखिरी लाइन को कैसे भी छूना चाहिए करके आशा से अपने हाथों से उनके बच्चे जो बाइबल का वचन लिखे थे उसको पढ़ने लगी थी | "वह दौड़ेंगे पर थकना जाएंगे| चलेंगे फिर भी नहीं थक जाएंगे |" करके वचन उनको बल दिया था | आखरी में एक कदम भी नहीं उठा पा रही थी परिस्थिति में उनके दोनों लड़कियां साथ दिए तो आखरी लाइन को देख कर आगे बढ़कर, उस पर अपने पैरों को रखने के समय में प्रभु का सामर्थ्य पूरा भर गया था | भरपूर चंगाई को भी प्राप्त की थी | विश्वास, बात मानना, मेहनत यह सब अद्भुत को लाया था | आखिरी लाइन में नहीं प्रभु का बात मानकर शुरुआत का लाइन में पैर रखने के समय में ही अद्भुत को प्राप्त करके दौड़ को शुरू की थी |
सुसान में राजा का पियाऊ था नहेमाया अपना खुद का देश के लोगों का दुख को सुनकर भी, यरूशलेम का शहरपनाह टूटने का परिस्थिति को सुनकर क्या करना नहीं समझते हुवे प्रभु का दर्शन और योजना को पाने वाला के रूप में जो मौका था उसको इस्तेमाल करके राजा से अनुमति और मदद को प्राप्त करके, विरोध के बीच में भी जो पैर आगे रखा था उसको पीछे नहीं हटाते हुए शहरपनाह को बनाना है करके एक निर्णय के साथ लोगों को भी अच्छा से इकट्ठा करके निर्णय किया गया 52 दिनों में प्रभु का दर्शन और योजना को पूरा करने वाला हो गया था |
परिस्थिति और मौका मानव भी विरोध में होने से भी हम लक्ष्य के ओर दौड़ना चाहिए करके निशाने के साथ प्रभु का मदद और मेहनत के साथ मजबूत होकर आगे बढ़ेंगे, तो लक्ष्य को पाने वाले के रूप में विजय को प्राप्त कर सकते हैं |
- Mrs.वसंती राजमोहन
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