By Village Missionary Movement
Monday, 19-Jul-2021दैनिक भक्ति (Hindi) 19-07-2021 (Bible Characters Special)
नामान
"...जो सम्मति मानता, वह बुद्धिमान है |" - नीतिवचन 12:15
प्रतिदिन का जिंदगी में हम में अनेक लोगों को हमसे छोटे लोग मतलब उम्र में हो या अनुभव में हो छोटे लोग कुछ भी कार्य को करने के लिए बताएंगे तो उसे ग्रहण करना कुछ लोगों के लिए बहुत कठिन लगता है | बहुत लोगों को बहुत कठिन होता है | परमेश्वर प्रतिदिन हम जो लोगों को मिलते हैं उन्हीं के साथ मिलजुल कर अपने कार्यों को पूरा करने के लिए योजना बनाते हैं | इसलिए दूसरों का मदद, सूचनाएं को ग्रहण करना बहुत जरूरी है | नहीं है तो उनके द्वारा प्रभु जो आशीर्वाद हमारे लिए रखा है उसको खोने का मौका है | कुछ समय में छोटे लोग भी हमें मदद कर सकते हैं | छोटे लोगों का मदद को प्राप्त करना नीचे परिस्थिति को दिखाता है करके दुनिया सोच रही है | परंतु हम संसार के नहीं हैं; संसार को जीत लिए हैं |
आराम के राजा के सेनापति नामान के घर में इसराइल से गुलामी से आई हुई एक छोटी लड़की थी | वह तो शूरवीर था परंतु कोड़ी था | इसको जानकर वह छोटी लड़की, "जो मेरा स्वामी शोमरोन के भविष्यद्वक्ता के पास होता, तो क्या ही अच्छा होता | क्योंकि वह उसको कोढ़ से चंगा कर देता"करके सूचना बता रही थी | छोटी लड़की का बात मानकर राजा के पास चिट्ठी लिखवा के निकल गया था | परंतु एलीशा तो अपना सेवक को भेजकर यरदन में सात बार स्नान करने पर कहला भेजा | नामान तो एक देश का सेनापति, राजा का प्रिय व्यक्ति, बहुत दूर से भी आया हुआ था | लेकिन जिस को मिलना था उसे नहीं मिल पाया | घर का सेवक को ही मिल सका | इस परिस्थिति को थोड़ा हम अपने मन की आंखों में लाएंगे | अपने गौरव, अधिकार सब के वजह से एलीशा आकर छूकर प्रार्थना करके चंगा देगा करके सोचा था | लेकिन सेवक आया हुआ था | करने का काम यरदन में सात बार स्नान करने का साधारण बात है | बहुत गुस्सा होकर वापस होने चाहा था | तब साथ में रहा हुआ सेवक धीरज से भी, मजबूत होकर भी भविष्यवक्ता एक बड़ा कार्य को करने के लिए कहा होता जरूर करते हैं ना? करके जो बात बताया उसको सुनकर मानके नामान यरदन मेंbसात बार स्नान करने लगा | कोढ़ का बीमारी ठीक होकर होकर लौट गया |
इसको पढ़ते हे प्रिय भाई, बहन आपको मदद करने पर आपके परिवार में, सड़क में, कलीसिया में, दोस्त के बीच में अनेक लोगों को प्रभु दिए हैं | उनके सूचना को सुनते हैं या नामान एलीशा ही सामने आकर कार्य को करना चाहिए जैसे चाहा, वैसे ही प्रभु ही बात करना चाहिए, प्रभु ही मुझे बोलना चाहिए करके सोचकर दूसरों का बातों को, सूचनाओं को तुच्छ करते हैं क्या? छोटी लड़की और भी गुलामी लड़की, अपने नीचे रहा हुआ सेवक इन दोनों का बातों को सुना, माना, अद्भुत को प्राप्त किया था | आज भी हमारे सामने में गवाही के रूप में खड़ा है | हमको भी प्रभु के अंदर के सूचनाएं बहुत आते रहता है | सुनकर मानेंगे तो अद्भुत होगा... नहीं है तो...! अंत हमारा हाथ में है!
- L.अलगरस्वामी
प्रार्थना का अनुरोध:
हम गांव में मिलकर चलाए बच्चे, जवान लोग प्रभु में बने रहने के लिए प्रार्थना करेंगे |
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