By Village Missionary Movement
Sunday, 23-Mar-2025दैनिक भक्ति (Hindi) 23-03-2025
चूहा और उसके दोस्त
"तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो।" - गलातियों 6:2
बकरियां मीं...मीं... करतीं, उधर मुर्गियां बांग...मुर्गे... करतीं और चूहे घर में घूम-घूम कर कीं... कीं...ऐसे ही सब दोस्त थे। एक दिन, एक चूहा घर के मालिक को हाथ में चूहेदानी लेकर बाहर से आता देखकर चौंक गया। सीधे घर में घुसे मालिक ने अपनी पत्नी से कहा कि आज हमें उस चूहे से छुटकारा पाना है जो कई दिनों से हमारे घर के आसपास घूम रहा है। यह सुनकर चूहे की धड़कन मानो रुक गई।
चूहा दुखी होकर सलाह और सांत्वना के लिए अपने दोस्तों के पास गया। सबसे पहले वह मुर्गे के पास गया और जो कुछ हुआ था उसे बताते हुए रोने लगा। तुरंत ही मुर्गी और चूहेदानी का मुझसे कोई लेना-देना नहीं था। यह आपके लिए रखा गया है। निराश होकर चूहा टर्की के पास गया और सारी बात बताई। टर्की हँसा। फिर मैंने मजाक में कहा कि ये तुम्हारा आखिरी दिन है। चूहा बहुत दुखी होकर बकरी के पास गया और बोला। तुरंत बकरी काटने वाली दुकान का आदमी आया और बोला कि मैं चिंतित था, यह आपकी चिंता है मुझे यह मत बताओ। चूहा ने बड़े दुःख से सोचा। अब से मैंने निश्चय कर लिया कि मैं अपना स्थान छोड़कर चूहेदानी के किनारे न जाऊँगा। रात के समय घर के मालिक ने मेमने को चूहेदानी में फँसा दिया। चूहा ने इसे देखा। फिर कुछ ही देर बाद जब सभी लोग सो गए तो शोर मचा। चूहे ने जब देखा कि चूहेदानी में उसकी जगह किसी और को फंसाया गया है तो वह एक तरफ हैरान हुआ और दूसरी तरफ खुश भी। क्योंकि जो सांप काफी देर से उसे खाने आ रहा था वह किसी तरह जाल में फंस गया। इस बात से अनजान मालकिन तेजी से आई और यह कहते हुए जाल उठाया कि चूहा फंस गया है और जाल में फंसे सांप ने उसे काट लिया।मालकिन ओ.. मालिक जल्दी से आये और मालकिन को बुला कर अस्पताल चले गये। उनकी जाँच करने वाले डॉक्टर ने उन्हें सांत्वना दी कि सौभाग्य से उन्होंने जहर सिर पर ला दिया और कहा कि जहर खून में मिल गया है, उन्हें दो दिन यहीं रहने दो।
तभी वहां उनसे मिलने आए एक शख्स ने कहा कि बीमार होने के लिए चिकन सूप बनाकर खाओ। जब वह घर आया तो मालिक ने मुर्गे को पीटा और सूप दिया। फिर उसने अपने रिश्तेदारों के लिए टर्की की दावत भेजी जो उससे मिलने आए थे। अब जब मालकिन संतुष्ट हो गई, तो मालिक ने शहर में दावत देनी चाही, इसलिए उसने अपने घर में पले बकरे को मार डाला और दावत दी। चूहा, जो यह सब देख रहा था, दुखी होकर सोचने लगा। किसी भी कारण से स्वार्थी न बनें। दूसरों के कल्याण की परवाह करने और उनकी मदद करने के लिए दृढ़ संकल्पित।
क्या प्यारे बच्चों! दूसरों के दुख-दर्द को न देखें और उन्हें खुश करने की पूरी कोशिश करें। ठीक है।
- Mrs.सारा सुभाष
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